Wednesday, January 20, 2010

कानून सिर्फ गरीबों के लिये अमीरों के लिये नहीं..

ठंड का मौसम, पसरा हुआ कोहरा, सर्द हवाएं, खुला आसमान और उस पर तन पर ना के बराबर कपड़े। जरा सोचिये ऐसी स्थिति में कोई भी आदमी कैसे रह सकता है। लेकिन भारत में लाखों लोग ऐसे है जो इस तरह जीने पर मजबूर है। सर्दी से बचने के नाम पर उनके पास सिर्फ चन्द कपड़े है। अकेले दिल्ली में हजारों लोग ऐसे बदतर हालात में गुजर-बसर कर रहे है। और सरकार द्वारा इनके लिये कोई खास इंतजाम नहीं किये जा रहे, उल्टा इतनी सर्दी में बिना नोटिस के दिल्ली सरकार और एम.सी.डी. गरीबों के बसेरों को उजाड़ने का काम कर रही है। ये सब राष्ट्रमंडल खेलों के मददेनजर किया जा रहा है। इन गरीबों के लिये बसेरे कि जिम्मेदारी भी सरकार और एम.सी.डी. की है, हालांकि खाना पूर्ति के लिये झुग्गियां उजाडने के बाद कुछ तम्बु जरूर लगा दिये गये, जो पर्याप्त नहीं थे। लेकिन इन सबके बीच उस 6 दिन के बच्चे का क्या कसूर जिसको उसकी मां खुले आसमान के नीचे सुलाने की नाकाम कोशिश कर रहीं थी। सवाल यहीं उठते है की दिल्ली सरकार मानवता तक भूल गयी है? ये वहीं सरकार है न जिसने इन लोगो को यहां के पते वाले वोटर कार्ड दिये थे? वोट लेते समय तो नेता जी ने भी बड़े-बड़े वादे किये होंगे, पर अब वो वादे और वो नेता कहां है?
दिल्ली को साफ-सुथरा बनाया जा रहा है। अवैध निर्माणों को हटाया जा रहा है। लेकिन क्या ये सब गरीबों के लिये ही है? दिल्ली के अन्दर कई एसी अवैध कॉलोनियां है जिनमे अमीर व रसूख वाले लोग रहते है, उन पर न तो एम.सी.डी. और न दिल्ली सरकार कोई कदम उठा रही है। उल्टा दिल्ली सरकार द्वारा अवैध जगहो पर वैध बिजली व पानी के कनेक्शन बाटे जा रहे हैं। इस सबको क्या कहा जाए? वो अमीर और रसूख वाले लोग तो अपने-अपने घरो में रजाई में बैठे चाय की चुस्की का मजा ले रहे होंगे लेकिन गरीब और बेघर लोग तो बस इस ठंड में किसी तरह जीने की जद्दोजहद में लगे होंगे। कानून सिर्फ गरीबों और मज़लूम लोगों पर ही लागू होता है क्या? और ऐसे में गरीबों की पैरवी करने वाले और मानवाधिकार के लिये चिल्लाने वाले लोग कहां सोये हुए है? उनके कानों में तो जूं भी नहीं रेंग रही है।
गरीब आदमी की जिन्दगी तो बस एसे ही कटती रहेगी और हम अपने-अपने एयर टाइट कमरों मे मज़े से आराम की नींद लेते रहेंगे…चलिये अपने दिल को यूं ही बहलाइये की ”हम कर भी क्या सकते है?” और सो जाइए…मेरी ओर से जब सोओ तब गुड नाइट।
.

-हिमांशु डबराल
himanshu dabral

Wednesday, January 13, 2010

बहुत याद आओगे तुम...


जब भी हम मुस्कुराएंगे, यू ही गुनगुनायेंगे
सपनो को सजायेंगे, कागज की नाव बनायेंगे
अँधेरे से
घबराएँगे, पर पास तुम्हे न पाएंगे
तो बहुत याद आओगे तुम...

जब भी सोचेंगे पुरानी
हर बात
तुम्हारा वो हंसी साथ,
जगमगाती वो
चांदनी रात
उसमे होती वो बरसात,
भीगे तन और भीगे मान की वो सौगात
जब भी सोचेंगे तो बहुत याद...
.
जब भी ढूढेंगे वो मस्ती,
पढने में वो सुस्ती
जब ख़ुशी होती थी बड़ी
सस्ती,
सबकी होती कुछ अपनी
कुछ हस्ती
जगमगाती थी हर बस्ती,
जब भी सोचेंगे तो बहुत याद...
.
जब भी ढूढेंगे यारों का साथ
मदद को बढ़ता वो हाथ,
सबके लिए प्यार, बच्चों का दुलार
जब भी सोचेंगे तो बहुत याद...

वो हंसी वादियाँ,
वो कोहरे की चादर
ठण्ड की कपकपाहट, बादलों का वो जहाँ
और उसमे चाय की वो चुस्की
जब भी सोचेंगे तो बहुत याद...

जब भी होंगे हम तन्हा
साथ न देगा कोई लम्हा,
जब भी बैठेंगे हम तनहाइयों में
दिल की रुसवाइयों में
जब भी सोचेंगे तो बहुत याद...

तुम्हारी वो अदा, वो मुस्कराहट, वो आहट
वो सादगी, वो खुशबु, जो महका गयी
जब भी सोचेंगे तो बहुत याद...

वो टूटते तारे को देखकर मन्नते मांगना
बारिश के पानी में कूदना
वो छीटें, वो पत्तें, वो पेड़, वो चिड़िया
जब भी सोचेंगे तो बहुत याद...
.
वो तुम्हारी कहानी, तुम्हारा वों बोलना
मन की बातों को दिल से
खोलना

जब भी ढूढुगा वो सावन
अनमना
सा वो मन
जब भी सोचेंगे तो बहुत याद...

जब भी लिखेंगे कुछ, जब भी
पढेंगे
कुछ
जब भी कहेंगे कुछ, जब भी सुनेगे कुछ
हर लफ्ज में जगमगाओगे तुम
जब भी
सोचेंगे तो बहुत याद आओगे तुम...

.
-हिमांशु डबराल

himanshu dabral

Saturday, January 9, 2010

Insulting Departed Soul


Ruchika Girhotra was resting peacefully after departing from her earthly abode, giving responsibility to her friend Aradhana and her parents to fight against not only her tormentor but also murderer.
She did not leave us because of her choice but was forced to by a beast in human form called S P S Rathor. She was prepared to fight and tolerate all inhuman treatment meted to her but her courage caved in after seeing insults and criminal charges inflicted on her Father and Brother. She was shattered by the treatment she got from her School, which is a second home for any child and a source of love, affection and moral courage.
Aradhana and her parents picked up the cudgel on Ruchika’s behalf thinking they have to fight only Khaki wearing monster, but on entering the arena it dawned on them that they were up against the whole Haryana political system irrespective of the parties they belong to as they pampered and promoted him in due course and also the bureaucratic family of the State.
Aradhana and her parents should be honored and bestowed national bravery award for standing up against such powerful lobby without having a fallback. Like communal riots during the partition and terrorist attacks on Kashmiri Pandits, this family was also made a refuge but they did not give up their fight for the right cause.
Our cool and patient judiciary after hearing the case for long nineteen years sentenced Rathor for SIX months imprisonment and a fine of Rs.1000/-. What Ruchika would have thought of this judgment if she could have risen form her ashes. All the pain, sorrow, humiliation would have gushed up and would have said loud and clear that her brutal murderer has been set free.
Our various NGO’s working for the cause of women or cry for women empowerment are surprisingly quiet or they will take another nineteen years to ponder and decide as to what line of action they should take against this unprecedented unjust sentence.
Men like Rathor if you can call them men are worst than Pandher and Koli put together because our constitution placed immense responsibility in their hands under oath and they very conveniently and scrupulously insult the trust.
Its time we should introspect as to who killed or rather who insulted the departed soul of Ruchika Girhotra, our politicans, our judicary by passing such a light sentence for such a heinous crime or our social structure which does not respond to any atrocities.
We need many more family like that of Aradhana.

-Rajive S Notyal

Friday, January 1, 2010

नव वर्ष की ढेर सारी शुभकामनाए



मेरी ओर आप सभी को अंग्रेजी नव वर्ष की सपरिवार हार्दिक शुभकामनाये...आप सभी के लिए आने वाला साल मंगलमय रहे...भगवान तथा बड़ों का आश्रीवाद सदा बना रहे...नया साल आपकी जिंदगी में खुशहाली और उन्नति लेकर आये...

.


इसी कामना के साथ -
.
हिमांशु डबराल