
जोशी जी के पदचिन्हों पर चलने वाले कई पत्रकारों के लिए ये बड़ा झटका है... लेकिन वो एक ऐसी राह बना कर गए है, जो पत्रकारिता को एक नयी दिशा देगी... उनके आदर्शो पर चलने वाले पत्रकार हमेशा उनके विचारों को जीवित रखेंगे...
बस दिल यही कहता है -
कौन कहेता है जोशी जी नही रहे,
रूह रुख़सत हुई है, शख्शियत हमेशा जवां रहेगी...
रूह रुख़सत हुई है, शख्शियत हमेशा जवां रहेगी...
भगवान उनकी आत्मा को शान्ति दे और उनके परिवार को इस घोर दुःख को सहने का बल प्रदान करे...
- हिमांशु डबराल
जोशी जी कोटिशः नमन एवं भावभीनी श्रद्धांजलि ...
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