Monday, December 21, 2009

कुछ पंक्तिया दिल से ...

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मंजिल दिखती है मगर मिलती नही,
मिलती तब है जब दिखना बंद हो जाये .

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किसी के दिल में किसी के ख्वाबो को जब पनाह मिलती है,
तभी एक आशिक को उसके इश्क की सदा मिलती है .

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जब से हम तुमसे मिले, ये नज़र झुकती नही,
देखती है बस तुम्हे, अब तो ये थकती नही .

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मुझको अपना कहने वाले, अपनी आखों को आईने में देख,
खुद से नज़रे मिला सको तो ठीक, नही तो नज़र आएगा फरेब

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महोब्बत के रंग में यू रंग न जाना,
कि अपना रंग ही नज़र न आये,
कोई तुम्हे ढूढ़ते हुए आये और, पहचान भी न पाए .

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-हिमांशु डबराल
himanshu dabral



1 comment:

  1. Sach me dil se likhi paktihyan hai....

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