अश्को के सागर में, अश्को को बहाकर क्या होगा,
बहाना ही तों अश्क सहरा में बहाओ, कम से कम कमबख्त रेत का रुख तो कुछ नम होगा...
-हिमांशु डबराल
तुझमे सुनने की तासीर नहीं तो कान बंद रख हमे तो बेबाक बोलने की आदत है ....!!!
अश्को के सागर में, अश्को को बहाकर क्या होगा,
बहाना ही तों अश्क सहरा में बहाओ, कम से कम कमबख्त रेत का रुख तो कुछ नम होगा...
-हिमांशु डबराल


हां मोहब्बत बाज़ारी नज़र आ रही है। वेलनटाइन वीक चल रहा है, बाज़ार प्यार के तोहफों से लदा हुआ है, हर आदमी की जेब के हिसाब से तोहफे बिक रहे है। ऐसे में एक नया ट्रेण्ड शुरू हो गया है, ‘जितना मंहगा गिफ्ट उतना ज्यादा प्यार’। ये सब आजकल के युवाओं में ज्यादा देखने को मिल रहा है पूरे वेलनटाइन वीक को कुछ इस तरह बनाया गया है कि लगभग हर दिन कुछ-न-कुछ गिफ्ट देना ही पड़ता है। क्या आज रिश्ते इन उपहारों के मोहताज़ हो गए है?कुछ लोगों का कहना है कि ये दिन प्यार जाहिर करने के लिए बनाये गए हैं। लेकिन प्यार तो भावनाओं और आत्मा का विषय हैं। एक छोटा सा गुलाब भी दिल की बात कह सकता है जबकि करोड़ों की अंगूठी नहीं।सरल सीखना है, बुरी आदत का,
मगर उनसे पीछा छुड़ना कठिन है।
सरल जिन्दगी में युवक प्यार करना,
सरल हाथ में हाथ लेकर टहलना,
मगर हाथ में हाथ लेकर किसी का,
युवक जिन्दगी भर निभाना कठिन हैं॥
-हिमांशु डबराल
himanshu dabral



एक साल पहले दहल गया था ‘पूरा देश’। मुम्बई में हुए सिलसिलेवार आंतकी हमलों ने पूरे देश में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। मौत का ऐसा मंजर किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। लाशों के ढेर में पसरा सन्नाटा और उस सन्नाटे में गूंजती गोलियों की आवाजें। पूरा देश आतंकियों के खूनी खेल को अपने-अपने टीवी सेटों पर टकटकी लगाए देख रहा था। 26/11 को एक साल हो गया है लेकिन आज भी लोग उस खौफनाक मंजर को यादकर सहम जाते हैं। आज भी एक आम आदमी घर से निकलने के बाद पहले सोचता है कि शाम को घर लौटगा कि नहीं। जिन्होंने अपने करीबी खोये, जिस मां ने अपने बेटे को खोया, जो बच्चे अनाथ हो गए, उन सबकी जिन्दगी तो 26/11 के बाद जैसे रूक गयी है। हर हिन्दुस्तानी के दिल से यही आवाज निकल रही है कि ‘बहुत हुआ अब’।